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सोशल मीडिया पोस्ट ने फंसाया! CJP नेता रत्ना सिंह की बढ़ गईं मुश्किलें, अवमानना की कार्रवाई को दिल्ली सरकार की हरी झंडी

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Khushbu Rawal
 Published : Nov 04, 2026 04:33 pm IST,  Updated : Nov 04, 2026 04:41 pm IST

सीजेपी नेता रत्ना सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती है। दिल्ली सरकार ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी है। आरोप है कि रत्ना सिंह ने X पर जज के खिलाफ टिप्पणियां की थीं।

ratna singh- India TV Hindi
रत्ना सिंह Image Source : PTI

दिल्ली सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की नेता रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दे दी है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने रत्ना सिंह के खिलाफ यह मंजूरी दी है। बता दें कि रत्ना सिंह सीजेपी की लीगल टीम की जिम्मेदारी संभालती हैं और पार्टी से जुड़े कानूनी मामलों में सक्रिय रहती हैं। 

जज पर टिप्पणी करना पड़ा भारी

दरअसल, रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए थे। इन पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया था कि कोर्ट के एक जज किसी अज्ञात 'मालिक' के निर्देश पर काम कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार की ओर से दी गई राय में कहा गया है कि इस तरह के आरोप पहली नजर में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करते हैं। साथ ही इससे न्याय व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। अब इस मंजूरी के बाद रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।

यहां जानें, क्या है पूरा विवाद

यह विवाद साकेत कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे द्वारा 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा रत्ना सिंह की कथित हिरासत के संबंध में राहत देने से इनकार करने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद, रत्ना सिंह ने X पर पोस्ट कर असंतोष व्यक्त किया गया और न्यायिक अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाया। सिंह ने एक पोस्ट में कहा कि "न्यायाधीश" "मालिक की सेवा कर रहा था" और दूसरे में सुझाव दिया गया कि पुलिस और न्यायाधीश दोनों "मालिक के आदेश का पालन कर रहे थे।"

इस पर वकील अमोल सिन्हा ने 2 नवंबर को अपनी राय में कहा कि रत्ना सिंह के आरोप प्रथम दृष्टया न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर हमला करते हैं। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट आपराधिक अवमानना अधिकार क्षेत्र को लागू करने के लिए पर्याप्त आधार पाए। सिन्हा ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी न्यायाधीश पर बाहरी प्रभाव या अनुचित इरादों का आरोप लगाना अलग बात है। 

उन्होंने कहा कि ऐसे बयान, जो यह सुझाव देते हैं कि एक न्यायाधीश स्वतंत्र विवेक के बजाय बाहरी निर्देशों के तहत कार्य करता है, न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं। अब ये कार्यवाही अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के अनुसार आगे बढ़ेगी, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट अंतिम निर्णय देगा।

ममता बनर्जी से मिले अभिजीत दीपके

उधर, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में ममता बनर्जी से मुलाकात कर NEET पेपर लीक और युवाओं के आंदोलन में समर्थन देने के लिए उनका आभार जताया है। ममता बनर्जी से मुलाकात के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि वह उनसे विशेष रूप से धन्यवाद देने आए थे। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए CJP के पहले आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी ने युवाओं का मजबूती से साथ दिया था। 

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